बिहार के नियोजित शिक्षक और सरकारी संवेदनहीनता की पराकाष्ठा

बिहार राज्य शिक्षक संघर्ष समन्वय समिति और बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ, पटना के बैनर तले बिहार के लाखों नियोजित शिक्षक एवं पुस्तकालयाध्यक्ष अपनी मूलभूत मांगो को लेकर हड़ताल पर गए थे। पिछले वर्ष माननीय उच्चतम न्यायालय से निराशा मिलने के बाद भी शिक्षकों और शिक्षक संघों ने न्यायपालिका का सम्मान करते हुए निर्णय को स्वीकार किया। समान काम के लिए समान वेतन संवैधानिक अधिकार है फिर भी न्यायालय के निर्णय का सम्मान करते हुए हड़ताल 2020 में सभी शिक्षक संगठनों ने  सिर्फ वही मांग किया जिसे सरकार ने देने का वादा किया था। 2015 के हड़ताल के बाद सरकार ने सेवा शर्त अविलंब लागू करने की बात कही थी, सदन में माननीय मुख्यमंत्री ने स्वयं कहा था कि सातवें वेतन के अनुरूप नियोजित शिक्षकों का भी वेतन निर्धारण होगा। पे लेवल 7-8 आदि हड़ताल के दौरान शिक्षक संघों द्वारा की गई सभी मांग सरकार के वादे के मुताबिक थे लेकिन वर्तमान बिहार सरकार कहती कुछ है और करती कुछ और है..!! 

लगभग 78 दिनों के हड़ताल के बावजूद भी कुछ ठोस निर्णय नहीं हो पाया। विद्यालय में रहने वाले शिक्षक अब सड़क पर नहीं रहना चाहते थे और कोरोना भी दस्तक दे चुका था। सरकार ने इसी का लाभ उठाया और हमारी भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया। हमारे संघों से कोरोना काल में हड़ताल तोड़ने की अपील और स्थिति सामान्य होने पर वार्ता करने का वादा... आज धोखा लग रहा है।
कोरोना के कारण आज जो स्थिति है उसके लिए सिर्फ सरकार दोषी है और कोई नहीं.. जो वोट की गंदी राजनीति के कारण बिहार को गर्त में ढकेल चुकी है। पूर्व में दो माह के लॉक डाउन से कोई फायदा नहीं हुआ जब पुनः लॉक डाउन लगाना ही पड़ रहा है। Daily wages पर काम कर रहे गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार के बीच आर्थिक संकट आया और भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गई है। 
यूँ तो बिहार सरकार की आपदा और महामारी के समय क्या तैयारी है, नज़र आ ही रहा है, बताने की जरूरत नहीं..! लेकिन नियोजित शिक्षकों के प्रति सरकारी संवेदनहीनता अपनी पराकाष्ठा पर है। लंबे हड़ताल में सरकार शिक्षक संगठनों से बात करना उचित नहीं समझती थी और जब कोरोना काल में शिक्षकों की सेवा की आवश्यकता पड़ी तो राज्यहित और जनहित के नाम पर हमें ब्लैकमेल किया। स्थिति सामान्य होने पर हमारी मांगों के प्रति सरकार सहानुभूति पूर्वक विचार करेगी और शिक्षक संगठन से वार्ता करेगी, ऐसा वादा किया गया था। आज राज्य के लगभग सभी सरकारी कार्य सम्पन्न हो रहे हैं लेकिन शिक्षक संगठनों से वार्ता के लिए सरकार के पास समय ही नहीं है। 

आज सरकार भीड़ लगवाकर स्कूलों से चावल वितरण और शिक्षको से अन्य कई तरह कार्य ले रही है जिसमें महामारी के फैलने का खतरा है लेकिन हमारे भविष्य और सुरक्षा पर कोई ध्यान नहीं दे रही है। सरकार हमारी मांगों पर अविलम्ब ध्यान दे वर्ना हम सरकार का कोई आदेश नहीं मानेंगे ऐसा अल्टीमेटम शिक्षक संगठनों और शिक्षक प्रतिनिधियों द्वारा निश्चित ही देना चाहिए।
         

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