शिक्षक सेवाशर्त नियमावली 2020 की कल जारी अधिसूचना अन्याय एवं भेदभाव पूर्ण : डॉ० कृतंजय चौधरी
नेचुरल जस्टिस के विरुद्ध आपत्ति वाले बिंदुओं को उच्च न्यायालय पटना में चुनौती देगा राज्य स्तरीय स्नातकोत्तर प्लस टू शिक्षक संगठन। उच्च न्यायालय को अधिकार है गैर कानूनी, भेदभाव पूर्ण नियमावली को निरस्त करने का। ऐसा कई बार कर चुका है।
उच्च माध्यमिक शिक्षकों को कोई प्रमोशन नहीं दिया गया। जबकि माध्यमिक शिक्षकों को 4 साल के बाद प्रमोशन दिया गया है। प्राथमिक व मध्य विद्यालय के शिक्षकों को भी प्रमोशन दिया गया। यह भेदभाव पूर्ण है। इसे पटना उच्च न्यायालय पटना में संघ चुनौती देगा।
भारत के सभी राज्यों , केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय में माध्यमिक शिक्षकों का प्रमोशन स्नातकोत्तर शिक्षक के पद पर होता है और स्नातकोत्तर शिक्षकों का सीधा प्रमोशन प्राचार्य के पद / वेतनमान पर होता है। लेकिन बिहार में स्नातक को तो दिया गया है स्नातकोत्तर को प्रमोशन नहीं दिया गया है।
निरंतरता में भेदभाव- बहुत से स्नातकोत्तर प्लस टू शिक्षक प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में 6-7 साल सेवा कर 2012 नियमावली के अनुसार नियोजन इकाई से अनुमति लेकर उच्च पद स्नातकोत्तर प्लस टू शिक्षक के पद पर योगदान किए हैं लेकिन उन्हें निरंतरता नहीं दी गई है। सुनियोजित भेदभाव के तहत बाद की तिथि से दी गई है।
उपरोक्त सभी कारणों से स्नातकोत्तर प्लस टू शिक्षक सबसे जूनियर हो जाएंगे और वो कभी प्रधानाध्यापक या प्राचार्य नहीं बन पाएंगे। नियोजन कैडर के सबसे उच्च पद पर रहने के बावजूद भी इस नियमावली से जूनियर बन जाने के कारण ना तो उनका प्रमोशन होगा न ही अब प्राचार्य बन पाएंगे। इस मुद्दे को भी पटना उच्च न्यायालय पटना में संघ चुनौती देगा।
पुरुष शिक्षकों के साथ भी लिंग के आधार पर भेदभाव किया गया है अधिकांश शिक्षक अपने जिले से बाहर हैं व कम वेतन में जिल्लत भरी जिंदगी जी रहे हैं। लेकिन उनको भी ट्रांसफर नहीं दिया गया है। संघ इस मुद्दे को भी उच्च न्यायालय पटना में चुनौती देगा।