प्राइमरी के बच्चे और ऑनलाइन स्कूल - डॉ० क्षितीश भूषण पाण्डेय
कोरोना काल में देश-दुनिया मानव जीवन सहित विविध प्रकार के नुकसान झेलने को बाध्य हो चुका है। दिनानुदिन स्थिति बद से बदतर होते जा रही है। सिस्टम, सरकार सब लाचार और बेबस नज़र आ रही है। लेकिन इन सब के बीच एक चर्चा का विषय बना हुआ है, बिना स्कूल खुले छात्रों की पढ़ाई...! अप्रैल माह के पहले या दूसरे सप्ताह में लगभग सभी प्राइवेट स्कूलों ने ऑनलाइन क्लास का फार्मूला अपना लिया। अभिभावकों ने अपने बच्चों का नामांकन इस उम्मीद के साथ नई कक्षा में कराना शुरू कर दिया कि एक-आध महीने में स्थिति तो सामान्य हो ही जाएगी और पुनः विद्यालय नियमित हो जाएंगे लेकिन परिस्थिति बिगड़ती ही जा रही हैं और इस वर्ष विद्यालय की कक्षाओं में बेंच-डेस्क धूल ही बटोरेंगे ऐसा प्रतीत होने लगा है। ख़ैर... विद्यालय यदि नहीं खुल पाते हैं तो भी बच्चों की पढ़ाई होनी चाहिए ऐसा सब चाहते हैं और विकल्प बस एकमात्र ऑनलाइन क्लास ही सूझ रहा है।
माध्यमिक स्तर के और उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों के लिए ऑनलाइन शिक्षा वर्तमान परिस्थिति में सम्भवतः आवश्यक भी है। परंतु प्री प्राइमरी और प्राइमरी के बच्चों के लिए कहाँ तक उचित है, मेरे समझ से परे है..! अपने अनुभव की बात करूं तो प्राइमरी कक्षा में पढ़ने वाली सात साल की मेरी बेटी के स्कूल ने प्रथम लॉक डाउन के दौरान ही व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से होमवर्क भेज कर पढाना शुरू कर दिया। लॉक डाउन में मैं भी घर बैठे बेटी को पढ़ने-पढ़ाने में लगा रहा। फिर आवश्यकता किताबों की पड़ी। विद्यालय प्रबंधन ने नई कक्षा में नामांकन के साथ किताबें देने की बात कही। मैंने नामांकन ले लिया, व्हाट्सएप पर मिल रहे वर्क को कराता रहा। यहां तक तो सब ठीक रहा, मोबाइल का संबंध सिर्फ होमवर्क देखने तक और पढ़ने-सीखने के लिए समय भरपूर था। अब एक महीने के बाद बात आई ऑनलाइन क्लास की। सुबह 9 बजे से 1 बजे तक ऑनलाइन क्लास और बच्ची की उम्र सात साल..!! बात यहीं रुक जाए तो कुछ ठीक लेकिन सर के ऊपर से निकल जाने वाले 4 घंटे के क्लास के बाद होमवर्क, टेस्ट पेपर आदि-आदि। अब हद तो तब हो गई जब मैंने देखा कि चैट बॉक्स में बच्चों से उत्तर टाइप करने को कहा जा रहा हैं। कितने अभिभावक सहमत हैं कि दूसरी-तीसरी कक्षा का बच्चा ऑनलाइन पढ़ाई करे और चैट बॉक्स पर उत्तर टाइप करे..? बच्चे की जितनी उम्र नहीं उससे अधिक उनके पढ़ाई के घंटे..! घोर आश्चर्य की बात तो ये है कि जहां आज बोर्ड के परीक्षाफल प्रकाशित हो गए बिना परीक्षा के, देश में बड़ी-बड़ी परीक्षाएं नहीं हो पा रही हैं लेकिन दूसरी ओर प्राइवेट स्कूलों ने अपने प्राइमरी के कक्षाओं के लिए भी फर्स्ट टर्मिनल परीक्षा की तिथि घोषित कर दी और साथ में एक सूचना जारी कर दिया कि जिन बच्चों का ट्यूशन फीस अपडेट नहीं होगा उन्हें परीक्षा से वंचित कर दिया जाएगा। अब बात समझ में आई कि सारा मामला तो यहीं आकर अटक रहा है। मैं विद्यालय प्रबंधन से निवेदनपूर्वक कहना चाहूंगा कि किसी अभिभावक में इतनी हिम्मत नहीं कि आपका एक नया पैसा भी रोक ले, भले आप अपने शिक्षक/कर्मियों का मेहनताना रोक लें। बस मैं प्राइमरी के बच्चों का ऑनलाइन स्कूल और ऑनलाइन परीक्षा को पचा नहीं पा रहा हूँ।