नियोजित शिक्षकों को छत्तीसगढ़ व असम सरकार की तरह स्थायी करे नीतीश सरकार - प्रदीप कुमार "पप्पू"

बिहार राज्य प्रारंभिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप कुमार पप्पू ने कहा कि राज्य भर के प्रारंभिक, माध्यमिक, उच्चतर माध्यमिक नियोजित शिक्षकों को छत्तीसगढ़ एवं असम सरकार से सीख लेकर नीतीश कुमार को समान काम समान वेतन दे देना चाहिए। इस बावत माननीय मुख्यमंत्री, बिहार पटना को ई मेल संदेश भेज कर कहा है कि सरकार की इच्छा शक्ति रहने पर हर कार्य संभव हो जाता है। राज्य में लम्बे समय से नियोजित शिक्षक अपनी माँगों की पूर्ति सरकार से करते रहे हैं। परन्तु शिक्षकों के हक को विभिन्न तरीकों से सरकार कुचलते आ रही है। उसके बाद भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को साकार करने की परिकल्पना करते हुए शिक्षकों के प्रति कभी गंभीर नहीं रही है। जिससे सरकार एवं शिक्षकों के बीच लगातार गतिरोध बना रहा। तीन माह में बनने वाली सेवा शर्त कमिटी पांच साल में कुछ नहीं कर पाए। जो राज्य के शिक्षा व्यवस्था का सबसे दुर्भाग्यपूर्ण पल है। उच्च न्यायालय पटना के आदेश को लागू करने के बजाय शिक्षकों के हक के विरुद्ध उच्चतम न्यायालय सरकार को जाना उनकी असलियत चाल एवं चरित्र को उजागर कर डाला। चुनावी वर्ष में भी सरकार अगर नहीं जगी तो इसका खामियाजा निश्चित रूप से भुगतना पड़ेगा। छत्तीसगढ़ सरकार ने अनुबंध पर काम करने वाले अस्थायी शिक्षाकर्मियों को स्थायी कर राज्य के शिक्षकों की भांति वेतन और सारी सुविधा दे दी है। दुसरे तरफ असम सरकार ने भी एडिशनल टीचर को स्थायी शिक्षकों की भांति वेतनमान एवं सभी सेवा सुविधा कर दिया है। जो दोनों सरकार का शिक्षा जगत में सराहनीय कार्य है। इससे राज्य की शिक्षा व्यवस्था सुदृढ़ होगी।
         माननीय मुख्यमंत्री सूबे के नियोजित शिक्षकों को भी छत्तीसगढ़ एवं असम सरकार के कार्यो को प्ररेणा स्वरूप लेते हुए बिहार में भी नियोजित शिक्षकों को राज्यकर्मी का दर्जा देकर सहायक शिक्षक की भांति वेतनमान (सातवें वेतन का) सेवा शर्त एवं सभी सुविधा लागू किया जाय। 
                   

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